1990 की दशक में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा विकसित की गयी “इंटीग्रिटी पैक्ट” (सत्यनिष्ठा समझौता) सरकारों, व्यवसायों एवं समाज के लोगों को सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने में मदद प्रदान करने वाला एक बहुमूल्य उपकरण है। आईपी (इंटीग्रिटी पैक्ट) का उद्देश्य दोनों पक्षों के नैतिक आचरण को बाध्य करके सार्वजनिक क्रय की पारदर्शिता को बनाए रखना है। इसमें सार्वजनिक लेन- देन हेतु सरकार अथवा सरकारी विभाग तथा समस्त बोलीदाताओं के मध्य एक समझौता होने की प्रक्रिया शामिल होती है। इसमें तहत यह अधिकार व शर्त लागू होता है कि इनमें से कोई भी पक्ष रिश्वत के भुगतान, पेशकश, मांग अथवा स्वीकार में शामिल नहीं रहेगा; अनुबंध प्राप्त करने हेतु प्रतियोगियों के साथ सांठ-गांठ नहीं करेगा; तथा अनुबंध को पूरा करते समय अन्य किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं करेगा । निगरानी के मामले में भी आईपी एक स्वतंत्र -निरीक्षण तथा जवाबदेही प्रदान करता है।

आईपी कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु सीसीएल ने मेसर्स ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के साथ दिनांक 11-8-08 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। दिनांक 23-08-2008 को आयोजित सीसीएल बोर्ड की 350वीं बैठक में उपर्युक्त समझौता ज्ञापन को लागू करने के पश्चात सीसीएल में आईपीपी को प्रचालित किया गया । वर्तमान में, सीसीएल द्वारा जारी निविदाओं को इंटीग्रिटी पैक्ट प्रोग्राम के तहत कार्यान्वयन करने हेतु सीवीसी ने दिनांक 13.03.2022 से तीन वर्षों की अवधि हेतु स्वतंत्र बाहरी निगरानीकर्ता के रूप में दो नामों को सूचीबद्ध किया है जिनके नाम निम्नलिखित है -


।. श्री साधु राम बंसल, पूर्व- अप्रनि, कॉर्पोरेशन बैंक ई-मेल: sr.bansal123@gmail.com
2. श्री गोडडिला विश्वनाथ रेड्डी, आईएफओएस (सेवानिवृत्त) ई-मेल: gvreddy.rajforests@gmail.com


ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन

अखंडता समझौता